कोरोना की जंग में खाकी बनी देवदूत आमजन की सुरक्षा के साथ जरूरतमंदों का भी ख्याल

कोरोना की जंग में खाकी बनी देवदूत आमजन की सुरक्षा के साथ जरूरतमंदों का भी ख्याल

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जयपुर / लोकेश जैन – कोरोना महामारी से जूझ रही पूरी दुनिया आज सभी परेशान और हैरान है। देश में लॉकडाउन कर इस संक्रमण से बचाव के लिए  प्रधानमंत्री ने सोशल डिस्टेसिग घरों में रहने के जनता से अपील की है और कहा भी है जान है तो जहां है ।

प्रधानमंत्री की अपील को सार्थक करने के लिए राजस्थान सरकार दिन-रात लगी हुई है। इसलिए कोरोना महामारी के संकट के दौर में आमजन को हर हाल सहयोग करना चाहिए। लॉकडाउन ने पुलिस का वो सामाजिक चेहरा भी सामने ला दिया है, जिसके बारे में लोग कम ही जानते हैं। जो लोग सिर्फ पुलिस का चेहरा समझते थे कि अपराधियों को पकड़ना या कानून व्यवस्था का पालन कराना वही पुलिस सकंट की घड़ी में इन दिनों पुलिसकर्मी इस तरह लोगों की सेवा में जुटे हैं, मानो सामाजिक कार्यकर्ता हों।

जिन इलाकों में गरीब लोग रहते हैं, वहां जाकर खाकी वाले न केवल राशन बांट रहे हैं बल्कि उनके लिए खाना तैयार कराकर भी पहुंचा रहे हैं पुलिस के आलाअधिकारियों ने भी आमजन के साथ सभी पुलिसकर्मियों को  संदेश दे रखा है कि इस समय लोग संकट में हैं, उनकी सेवा करो। संदेश का असर इस कदर है कि पुलिस कमिश्नरेट से लेकर थानाधिकारी व सभी थानो के जवान चाहे व शहर हो गाँव जगह-जगह भोजन वितरित कर रहे हैं। जाहिर है लोग भी कहने लगे हैं कि इन मुश्किल हालात में पुलिस इस तरह नहीं जुटती तो कोरोना से अधिक मौतें  और भूख और अन्य कारणों से हो जाती। जाहिर है कि नेतृत्व बेहतर हो तो फिर सिस्टम बेहतर हो जाता है।

कोरोना  की इस जंग में पुलिस  जिम्मेदारियों को बख़ूबी निभा रही है  ये वे कोरोना फाइटर्स हैं जिन्हें आम दिनों में नजर अंदाज़ किया जाता था. आज एक तरफ जहां  पुलिस प्रशासन के लोग अपनी कर्तव्य परायणता के कारण समाज में पूजे जा रहे हैं और आमजन की सुरक्षा के लिए पूरा पुलिस महकमा कंधे से कंधा मिलाकर अपने कर्तव्यपथ पर डटे हुए हैं.

राजस्थान पुलिस दिवस पर पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव ने बताया था पुलिस आज 1965,1971 के युद्ध हों या कोरोना जैसी महामारी राजस्थान पुलिस कंधे से कंधा मिलाकर प्रदेशहित में तत्पर है

कल तक लोग इन्हे उतना महत्व नहीं देते थे परन्तु इस विषम परिस्थिति संकट काल में भी बिना रुके बिना थके अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहे है इन कोरोना योद्धाओं की अहमियत अब लोगों को समझ में आ रही है. उसी बीच कुछ अपवादों को क्यों इनकी  दिव्यशक्ति का अंदाज़ा नही हो रहा आज इस संकटकाल में जो आमजन अपने परिवार के भविष्य की चिंता में घर मे खुद को महफूज समझ रहा है उसी संकट की घड़ी में 24 घण्टे कार्यरत पुलिस की अहमीयत्ता को समझे  और खाकी के पीछे छुपे देवदूत का सम्मान करें ना कि उन्हें कोई हानि पहुँचाने का दुस्साहस न करे, इस प्रकति के कहर में  चिकित्सक और पुलिस ही है कर्तव्यपरायणता के योद्धा है।

इनका सम्मान हो कोरोना योद्धाओं की राहों में फूलो की बारिश हो ना कि हमलों की साजिश जिस तरह आज अपराध इस जहां से जैसे गायब हो गया है घर परिवार चार दिवारी में  सिमट कर रह गया है आज इन विषम परिस्थितियों की जंग से अगर जितना है तो सरकार के आदेशों की पालना करनी ही होगी  कर्मवीर कोरोना योद्धाओं का हर हाल में सम्मान करना ही देश और परिवार हित मे है |

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