जन आंदोलन का सकारात्मक असर, केन्द्र ने भी की सराहना – मुख्यमंत्री

जन आंदोलन का सकारात्मक असर, केन्द्र ने भी की सराहना – मुख्यमंत्री

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जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ’कोरोना के विरूद्ध जन आन्दोलन’ तथा ’नो मास्क, नो एन्ट्री’ अभियान का आमजन में सकारात्मक असर पड़ा है। लोगों में मास्क पहनने के प्रति चेतना बढ़ी है तथा आमजन एक-दूसरे को भी कोरोना संक्रमण से बचाव के बारे में जागृत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए कोरोना प्रबंधन के हमारे प्रयासों को सराहा है। केन्द्र सरकार ने अन्य राज्यों से भी अपेक्षा की है कि वे भी ऎसे अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें।

गहलोत मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति और जन आन्दोलन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोगों ने इस जन-आन्दोलन को खुले दिल से अपनाया है। सरकारी मशीनरी के साथ-साथ गैर-सरकारी संस्थाएं एवं आमजन भी अभियान में खुलकर भाग ले रहे हैं, इससे यह प्रभावी बन गया है। उन्होंने त्यौहारी सीजन में कोरोना संक्रमण को नियंत्रण में रखने के लिए हैल्थ प्रोटोकॉल की पूरी तरह से पालना सुनिश्चित करने तथा आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सोशल डिस्टेंसिंग रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने आगामी नवम्बर माह में पॉजिटिव केस बढ़ने की आशंका को देखते हुए अभी से ही समुचित तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने पिछले छह माह से अधिक समय से लगातार काम कर रहे चिकित्सकों व पैरामेेडिकल स्टाफ की सेवाओं की सराहना की और कहा कि उनके सहयोग के लिए श्वसन एवं मेडिसिन के अलावा अन्य विशेषज्ञता वाले चिकित्सकों की भी सेवाएं ली जाएंं। उन्होंने स्वायत्त शासन सचिव को निर्देश दिए कि कोरोना के विरूद्ध जन आन्दोलन की गति धीमी नहीं हो यह सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना पॉजिटिव हुए लोगों में फेंफड़े कमजोर होना, शरीर कमजोर होना जैसे कई तरह के साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। नेगेटिव हुए लोगों को भी कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऎसे में लोग इस महामारी को हल्के में ना लें। वे पूरी गंभीरता के साथ मास्क पहनने, उचित दूरी रखने सहित अन्य हैल्थ प्रोटोकॉल की पालना करें।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि स्वयंसेवी संगठन एवं सामाजिक संस्थाएं आगे आकर मास्क वितरण सहित विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता निभा रही हैं। बैठक में प्रमुख शासन सचिव गृह अभय कुमार ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आगामी दशहरे एवं दीपावली पर्व के दौरान पटाखों से फैलने वाले प्रदूषण और धुएं के कारण कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने एवं इलाज करा रहे मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका व्यक्त की है। ऎसे में ज्यादातर जिलों से मिल रहे फीडबैक में कोरोना से जीवन रक्षा के लिए विशेषज्ञों की राय के प्रति सकारात्मक रूख सामने आया है।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अखिल अरोरा ने बताया कि केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव, केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने राजस्थान सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण की शुरूआत से ही चिकित्सा प्रबंधन के साथ निरन्तर चलाई गई जागरूकता संबंधी गतिविधियाें एवं 2 अक्टूबर से शुरू किए गए ’कोरोना के विरूद्ध जन आन्दोलन’ की जमकर तारीफ की।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने राजस्थान में शत प्रतिशत आरटीपीसीआर टेस्ट करने, गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था करने के साथ ही 35 मेडिकल संस्थानों में बड़ी क्षमता के कम्प्रेस्ड एयर ऑक्सीजन प्लांट लगाने, नेगेटिव कोविड मरीजों के सीटी स्केन में निमोनिया के लक्षण पाये जाने पर उन्हें कोेविड मरीज मानकर उपचार करने, ठीक हो चुके मरीजों की पर्याप्त मॉनिटरिंग एवं उनके लिए अपनाए गए पोस्ट कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल जैसे कदमों की सराहना की। केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने अन्य राज्यों को भी इन कदमों के अनुकरण करने की सलाह दी।

बैठक में चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, चिकित्सा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, पुलिस महानिदेशक (अपराध) एम.एल लाठर, प्रमुख सचिव गृह अभय कुमार, सचिव चिकित्सा शिक्षा वैभव गालरिया, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

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