जयपुर, जोधपुर व कोटा में 2-2 नगर निगम होंगे

जयपुर, जोधपुर व कोटा में 2-2 नगर निगम होंगे

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जयपुर 18 अक्टूबर। जयपुर, जोधपुर व कोटा में 2-2 नगर निगम होंगे। नवगठित नगर निगमों के वार्डो के सीमांकन परिसीमन का कार्य अगले 2-3 माह में पूर्ण करा लिया जायेगा। जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग। इनकी मतदाता सूचियां तैयार कर आम चुनाव करा सकेगा। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया छः माह में सम्पन्न होगी।
यह जानकारी शुक्रवार को दोपहर  नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री  शांति धारीवाल ने अपने निवास स्थान पर आयोजित प्रेस कांफ्रेस में दी। इस अवसर पर मुख्य सचेतक महेश जोशी, शासन सचिव स्वायत्त शासन विभाग  भवानी सिंह देथा, आयुक्त नगर निगम जयपुर वी.पी.सिंह व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर  शांति धारीवाल ने कहा कि नवगठित नगर निगमों के वार्डो के सीमांकन परिसीमन का कार्य अगले 2-3 माह में पूर्ण करा लिया जायेगा। जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग। इनकी मतदाता सूचियां तैयार कर आम चुनाव करा सकेगा। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया छः माह में सम्पन्न होगी। जयपुर, जोधपुर, कोटा के वर्तमान नगर निगमों का कार्यकाल नवम्बर में समाप्त हो जायेगा, जिसके बाद वर्तमान निर्वाचित बोर्ड कार्यरत नहीं रह पायेगा और नये नगर निगमों का आम चुनाव होने तक अन्तरिम रूप से प्रशासनिक व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जायेगी।
धारीवाल ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की जानकारी देते हुये बताया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 3 की उप धारा (1) के खण्ड (सी) के तहत नगरपालिका जिसमें नगर परिषद व नगर निगम भी शामिल है, के सृजन करने, सीमायें घटाने-बढ़ाने एवं विद्यमान नगरपालिका/परिषद/निगम को दो या अधिक भागों में विभाजित करने उनकी सीमायें निर्धारित करने का राज्य सरकार को अधिकार प्रदत्त किया गया है। इसी प्रकार धारा 3 की उप धारा (1) के खण्ड (डी) के उप खण्ड (प) के अनुसार नयी नगरपालिका/परिषद/ निगम के गठन के उपरान्त छः माह के भीतर चुनाव करवाये जाने की व्यवस्था है। धारा 5 के अन्तर्गत किसी नगरपालिका क्षेत्र को नगर निगम घोषित करने की शक्तियां राज्य सरकार को है तथा धारा 6 के अन्तर्गत राज्य सरकार नगरपालिकाओं में समय-समय पर वार्डो की संख्या निर्धारित कर सकती है। धारा 10 के अन्तर्गत नये वार्डो का गठन करते हुये उनका सीमांकन करने की शक्तियां भी राज्य सरकार को प्रदत्त की गयी है। बड़े शहरों में जनसंख्या की वृद्धि, बढ़ते हुये कार्यभार उनके हैरिटेज के महत्व आदि को मध्यनजर रखते हुये राज्य सरकार समय-समय पर उपरोक्त प्रावधानों का प्रयोग करती है।

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