महाविद्यालय व विश्वविद्यालय में 16 अप्रैल से 31 मई तक ग्रीष्मावकाश घोषित

महाविद्यालय व विश्वविद्यालय में 16 अप्रैल से 31 मई तक ग्रीष्मावकाश घोषित

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जयपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में लागू लॉकडाउन के बीच विराम की इस अवधि में 16 अप्रैल 2020 से 31 मई 2020 तक प्रदेश के राजकीय एवं गैर राजकीय महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश घोषित कर दिया गया है। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी ने रविवार को बताया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के प्रति सजग है। कोरोना वैश्विक महामारी के चलते सरकार ने विश्वविद्यालयों में शिक्षण, प्रशिक्षण तथा सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक परीक्षाएं आगामी आदेशों तक स्थगित रखने का निर्णय किया था। विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी या अकादमिक हानि नहीं हो, इसे दृष्टिगत रखते हुए स्थगित परीक्षाओं एवं आगामी सत्र प्रारंभ करने के संदर्भ में सुझाव देने के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. कोठारी के संयोजन में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट 11 अप्रैल 2020 को राज्य सरकार को प्रस्तुत कर दी है। समिति द्वारा की गई अनुशंषाओं के आधार पर छात्र हित में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी कॉलेजों में 16 अप्रैल से 31 मई तक ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है।

उन्होंने बताया कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर स्थगित परीक्षाएं कोरोना से बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करते हुए स्नातक एवं स्नात्तकोत्तर की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं का आयोजन जून 2020 के प्रथम सप्ताह से एवं स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष व स्नातकोत्तर पूर्वाद्र्ध/वार्षिक/सेमेस्टर परीक्षाओं सहित अन्य परीक्षाएं 15 जून के बाद आयोजित की जाएंगी। प्रायोगिक परीक्षाएं भी मुख्य परीक्षा के साथ या उसके तुरन्त बाद कराई जाएगी। इन परीक्षाओं के परिणाम भी प्राथमिकता से यथाशीघ्र घोषित किए जाएंगे, इसके लिए उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य तत्परता से एवं अविलम्ब करवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर नया अकादमिक सत्र 1 जून 2020 से आरम्भ किया जाएगा। स्नातक प्रथम वर्ष व अन्य समकक्ष पाठ्यक्रमों, जिनमें प्रवेश के लिए अहर्कारी परीक्षा 12वीं उत्तीर्ण है, के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून 2020 या 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बाद आरम्भ की जाएगी।
परीक्षा परिणाम देरी से आने की स्थिति में स्नातक द्वितीय एवं तृतीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर उत्तराद्र्ध की कक्षाओं में विद्यार्थियों को अस्थाई प्रवेश देकर कक्षाएं आरम्भ की जाएंगी। प्रोफेशनल पाठ्यक्रम-एजुकेशन, विधि एवं एमबीए की परीक्षाओं का आयोजन एवं उनके आगामी अकादमिक सत्रारंभ के लिए उनकी सम्बद्ध नियामक शीर्ष संस्थाओं एनसीटीई, बार काउंसिल ऑफ इण्डिया, एआईसीटीई आदि के दिशा निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी। स्नातकोत्तर स्तर पर विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षाओ का आयोजन संभव नहीं हो पाएगा। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को गत परीक्षाओं में प्राप्तांकों की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।

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