राम मंदिर को सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की कवायद शुरू , आज संतों की बैठक में कार सेवा का ऐलान संभव

राम मंदिर को सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की कवायद शुरू , आज संतों की बैठक में कार सेवा का ऐलान संभव

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आगामी संसदीय चुनाव में राम मंदिर को सबसे बड़ा मुद्दा बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इस पर भावी रणनीति तय करने के लिए विहिप से जुड़े संतों की उच्चाधिकार समिति की शुक्रवार को बैठक हो रही है। मंदिर निर्माण की व्यूह रचना के लिए इस माह के अंत में संघ की बैठक होने वाली है। उसके बाद दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 3 और 4 नवंबर को 5000 संतों का धर्मादेश सम्मेलन होने वाला है। उसी में कार सेवा की तारीख का ऐलान होगा।

समिति से जुड़े एक संत के मुताबिक राम मंदिर मामले में इस्माइल फारुकी बनाम केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद त्वरित सुनवाई की उम्मीद बंधी थी। हालांकि कार्यभार संभालने के पहले ही दिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जिस प्रकार त्वरित सुनवाई के मापदंड तय किए, उस खांचे में अयोध्या मसला नहीं आता।

हालांकि 29 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई में शीर्ष अदालत का रुख साफ हो जाएगा, लेकिन विहिप का कहना है कि वह इस मामले में अधिक इंतजार नहीं करेगी। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार की बैठक से पूर्व ही इस समिति में शामिल करीब 35 संतों में राम मंदिर के लिए जल्द कुछ कार्यक्रम घोषित करने पर सहमति है।

संघ के एजेंडे में भी मंदिर

दीपावली से पूर्व होने वाली संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक का भी मुख्य एजेंडा राम मंदिर ही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के जल्द निर्माण की वकालत पहले ही कर दी है। बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, संगठन महासचिव राम लाल, महासचिव राम माधव और संघ के तीन सौ से अधिक अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

1991 व 1996 में भी राम मंदिर था बड़ा चुनावी मुद्दा

नब्बे के दशक में 1991 और 1996 में राम मंदिर लोकसभा चुनाव का केंद्रीय मुद्दा था। हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे यह मुद्दा पीछे छूटता चला गया। नई सदी के पहले दशक में पुरातत्व विभाग को विवादित स्थल पर खुदाई के अदालती आदेश, वाजपेयी सरकार में अयोध्या विभाग बनने और इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद भी यह केंद्रीय मुद्दा नहीं बन पाया। अब एक बार फिर से इसे केंद्रीय मुद्दा बनाए जाने की तैयारी है।
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