श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को

58 views
1

टोंक। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार रोहिणी नक्षत्र अर्धरात्रि को वृष के चंद्रमा में हुआ था । परम्परा के अनुसार इस व्रत के सम्बन्ध में दो मत पर चलित है।

स्मार्त सम्प्रदाय वाले अद्र्ध रात्रि का स्पर्श होने पर सप्तमीयुक्ता अष्टमी में व्रत उपवास करते हैं, क्योंकि उनके अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अद्र्ध रात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में चंद्रोदय होने पर अष्टमी तिथि में हुआ था ।

जबकि वैष्णव सम्प्रदाय अद्र्ध रात्रि में अद्र्ध अष्टमी की उपेक्षा करके नवमीयुक्ता अष्टमी में व्रतादि करते हैं, अधिकांश विद्धवानों ने अद्र्ध रात्रि अष्टमी में व्रत पूजन एवं उत्सव मनाने की पुष्टि की है । श्री मद् भागवत, श्री विष्णु पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण आदि में भगवान श्री कृष्ण की अद्र्ध रात्रि युक्ता अष्टमी में जन्म की पुष्टि करते हैं ।

मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि धर्म सिंधुकार के अनुसार अद्र्ध व्यापिनी तिथि शास्त्र सम्मत एवं मान्य है । 12 अगस्त बुधवार को उदय व्यापिनी तिथि जो सुबह 11.16 बजे तक रहेगी उपरांत नवमी तिथि का शुभारंभ है, कृतिका नक्षत्र आधी रात के बाद 3.26 बजे तक उपरांत रोहिणी नक्षत्र का शुभारंभ है ।

वृष राशि का चन्द्रमा है । अत: 12 अगस्त बुधवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी अष्टमी युक्त नवमी तिथि कृतिका नक्षत्र युक्त रोहिणी नक्षत्र में व्रत जप अनुष्ठान एवं जन्मोत्सव् मनाया जायेगा । बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि धर्म शास्त्रों के अनुसार ज्योतिष के विद्वानों ने भी रोहिणी योग अद्र्ध रात्रि में उत्तम, अर्ध रात्रि के बाद रोहिणी योग मध्यम और दिन के आदि में रोहिणी नक्षत्र न्यूनतम बताया गया है।

वशिष्ट संहीता में वर्णन है कि यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अद्र्ध रात्रि में अंश पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी यह योग होने से उसी दिन को मान लेना चाहिए। निर्णय सिंधु में बताया गया है कि जब पूर्व दिन या पर दिन रोहिणी नक्षत्र योग हो और अष्टमी का सहयोग हो तो उसी दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव पालन करना चाहिए, विष्णुधर्मोत्तरा पुराण में भी कहा गया है

आधी रात के समय में रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण अर्चना पूजन करने से अनेक पापों का नाश हो जाता है अगर दिन में अष्टमी हो और रात्रि के अंत में रोहिणीयुक्त हो तो यह जयंती के लिए विशेष शास्त्र सम्मत है। ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है अभिजीत नक्षत्र, जयंती नामवाली रात्रि विजय नाम का मुहूर्त होता है,

इसी में भगवान श्रीकृष्ण जनार्दन अवतरित हुए हैं, तो दिन में या रात में कला मात्र भी रोहिणी का योग हो अष्टमी संयोग हो बुधवार का दिन हो तो यह जन्म उत्सव के लिए सबसे ग्राहय् है । इसमें रोहिणी का योग आधी रात में हो तो व्रत महोत्सव के लिए उत्तम है।

बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इन सभी पुराण मतों के अनुसार इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्म उत्सव 12 अगस्त को मनाया जायेगा, क्योंकि 12 अगस्त बुधवार को उदयातिथि में अष्टमी उपरांत नवमी है, कृतिका नक्षत्र में रोहिणी नक्षत्र रात्रि में स्पर्श कर रहा है। भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव व्रत इस दिन बड़े आनंद, हर्ष उल्लास से मनाएं।

About author

Your email address will not be published. Required fields are marked *